Moradabad : नगर विधानसभा सीट पर 2027 में भाजपा का कौन बनेगा चेहरा
वर्तमान विधायक पर फिर पार्टी लगायेगी दांव या नये चेहरे पर जतायेगी भरोसा

मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश में विधानसभा 2027 के चुनाव में साल भर का समय बचा है। इसी के मददेनजर सभी पार्टी अपने प्रत्याशी के चयन पर लगी है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा पिछली बार से ज्यादा सीटों पर विजयश्री पाने के लिए अभी से अपने वर्तमान विधायकों के साथ उन सीटो पर भी सर्वे करा रही है जिनपर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। भाजपा की उन सीटो पर सबसे ज्यादा नजर है जो बहुत कम अन्तर से जीती थी। जिनमें से एक सीट है 28 नगर विधानसभा मुरादाबाद। इस सीट पर हमेशा हिन्दू मुस्लिम प्रत्याशी की ही टक्कर रही हैं। पिछले विधनसभा चुनाव मे ये सीट 782 वोटों के अंतर से भाजपा के खाते मे आयी थी। भाजपा से रितेश गुप्ता इस सीट पर दूसरी बार विधायक चुने गये थे। भाजपा को इस सीट पर इस बार खतरें के बादल दिखाई दे रहे है। क्योकि मुरादाबाद नगर की ये सीट हमेशा हिन्दू मुस्लिम बोटरो पर ही टिकी रही है। एसआईआर के बाद इस सीट पर ज्यादातर हिन्दू वोट ही कटे है। ऐसे मे भाजपा अब इस कोशिश मे है कि ऐसे प्रत्याशी को मैदान मे उतारा जाये जो दोनो ही समुदाय मे अपनी पकड़ रखता हो। हालाकि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी जीते हुये प्रत्याशी को ही पहली प्राथमिकता देगी लेकिन कई ऐसी सीटे है जिनपर भाजपा नेता ही अपने विधायक की खिलाफत में लगे है। मुरादाबाद नगर विधानसभा भी उन्ही सीटों मे से एक है।
यहां भाजपा के दो गुटो के बीच की कलह भी भाजपा को इस सीट पर नुकसान पहुंचा सकती है। एक गुट के नेता ने मुख्यमंत्री योगी जी के सामने दो प्रत्याशियों की दावेदारी ठोक कर सीट जिताने का दावा भी कर दिया और यहां तक भी बता दिया कि अगर सीट पर वर्तमान विधायक को लडाया गया तो नगर विधानसभा से भाजपा का जितना मुश्किल ही नही नामुमकिन हो जायेगा। दरअसल आपको बताते चले कि मुरादाबाद की भाजपा दो गुट में बटी हुई है। इसका जीता जागता उदहारण हाली में जारी हुई भाजपा जिला संगठन की सूची है। जिसमें भाजपा के कई पुराने चहरों को तवज्जों न देकर ऐसे चहरों पर दांव खेले गये जो इन दोनों गुटो के प्रिय थें। इसी का असर है कि सोशल मीडिया पर नये संगठन के खिलाफ पुराने कुछ चेहरों ने बगावत का बिगुल छेड दिया। जिसका सीधा फायदा विपक्ष को मिलेगा। हिन्दू वोटरों में ब्राहम्ण, वैश्य, सैनी बाहुल्य इस सीट पर सबसे ज्यादा ही इस सीट का भविष्य तय करते है और पिछले कुछ सालों में इन्ही बिरादरियों की अनदेखी होने के कारण भाजपा को इस चुनाव में कड़ी मेहनत करने की जरूरत पडेगी। मुरादाबाद नगर सीट में भाजपा का वोट बैंक हमेशा लाइनपार क्षेत्र रहा है। लेकिन लाईनपार की जनता में भी इस बार भाजपा को लेकर काफी नाराजगी है।
लाईनपार के विकास नगर निवासी एड0 देशराज शर्मा का कहना है कि भाजपा को पूरा विकास नगर एक तरफा वोट करता है लेकिन कभी किसी जनप्रतिनिधि ने विकास नगर के विकास पर ध्यान नही दिया। बरसात के समय पर पूरा विकास नगर मे धरों मे पानी घुस जाता है। कई बार शिकायते भी की गयी लेकिन को समाधान नही निकला। मीडिया में खबरे आने के बाद नालों की थोडी सफाई कर दी जाती है लेकिन कोई पुख्ता इंतजाम नही हुये। इस बार विकास नगर की जनता मन बना चुकी है जब घरों में पानी ही घुसना है तो भाजपा ही क्यो।
अब बात करें भाजपा किन चेहरों पर 2027 के विधानसभा चुनावों में प्रत्याशी के रूप में दांव खेल सकती है। सबसे पहला नाम वर्तमान विधायक रितेश गुप्ता का है। रितेश गुप्ता दो बार से लगातार विधायक है और जनता के प्रिय भी है। लेकिन पिछले 9 सालों में विकास की बात की जाये तो विधायक निधि से ऐसा कोई कार्य नही हुआ जिससे जनता को सीधा लाभ मिला हो। उपर से साथ खडी रहने वाली जनता इस बार नगर विधानसभा के वर्तमान विधायक से नखुश है। ऐसे में भाजपा दुसरे विकल्प की भी तैयारी में है।

दूसरा सबसे ज्यादा नाम जो चर्चा में है पूर्व महानगर अध्यक्ष मनोज गुप्ता का है। भाजपा के पुराने सिपाही है और संगठन में भी पकड़ अच्छी रखतें है। कई वरिष्ठ नेता मनोज गुप्ता की पैरवी में लगे है और दावा भी कर रहे है यदि मनोज गुप्ता को विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया गया तो हर हिन्दू बिरादरी के साथ मुस्लिम समुदाय भी मनोज गुप्ता को जिताने का काम करेगा। क्योकि सरल स्वभाव मृदूभाषी मनोज गुप्ता हर किसी के प्रिया है। संगठन चुनाव मैदान में मनोज गुप्ता जैसे कार्यकर्ता को उतारना तो चहाता है लेकिन कुछ आर्थिक परेशानियों के चलते हर चुनाव में मनोज गुप्ता को निराशा ही मिलती है।

इसी कड़ी में तीसरा नाम जुड़ा है भाजपा से पूर्व देहात विधानसभा से प्रत्याशी और कोठीवाल डेंटल कालेज के डारेक्टर केके मिश्रा का । ब्राहम्णों की हमेशा पैरवी करने वाले केके मिश्रा को जहां सभी ब्राहम्णों का सहयोग मिलेगा वही दूसी बिरादरी भी मिश्रा जी को पसंद करती है। केके मिश्रा की पैरवी भी संगठन में कई नेता कर रहे है। लकिन सुत्रों का कहना है कि केके मिश्रा को इस बार भी देहात विधानसभा से चुनाव मैदान में उतारा जायेगा। क्योकि देहात विधानसभा का केके मिश्रा को अनुभव भी है और डेंटल कालेज के डारेक्टर होने के नाते उनकी पकड़ भी देहात क्षेत्र मे ज्यादा है।

दो बार से लगातार टिकट मांग रहें भाजपा नेता अनुपेन्द्र सिंह भी इस बार अपनी दावेदारी पेश करेगें। अनुपेन्द्र सिंह भाजपा के ऐसे नेता है जो सिर्फ जनता के लिए सोचते है। लाईनपार के विकास के लिए हर आंदोलन में सबसे पहले अनुपेन्द्र खडें दिखाई देते है। कपूर कम्पनी पूल के आंदोलन के लिए अनुपेन्द्र सिंह ने दिन रात मेहनत की फिर सीएम ग्रिड योजना को लाईनपार मे लागू कराने के लिए पैदल मार्च से लेकर कैंडल मार्च तक निकाल दिया। जनता के साथ खड़े रहने वाले अनुपेन्द्र सिंह जाट बिरादार से आते है और भाजपा मुरादाबाद में ओबीसी मोर्चे के वरिष्ठ नेता है। अनुपेन्द्र सिंह की छवि लाईनपार में खास नेता के रूप में बनी हुई है। पेशे से अधिवक्ता अनुपेन्द्र सिंह एक विधालय का भी संचालन लाईनपार में करते है और समाजसेवा में भी हमेशा आगे रहते हैं। अनुपेन्द्र सिंह की दावेदारी भी पर जनता का मानना है कि लाईनपार के सुख दुख में साथ खडे रहने वाले को पहले प्राथमिकता देनी चाहिये। लंकिन जाट वोटो की संख्या कम होने के कारण भाजपा से हमेशा अनुपेन्द्र सिंह को निराशा ही मिलती है।

दावेदारी करने वाले और भी कई नाम है लेकिन आने वाले चुनाव में यही चेहरे ज्यादातर भाजपा संगठन और लोगों की जुबान पर सुनायी देगें। सुत्रों का मानना है भाजपा इस बार वैश्य पर दांव न खेलकर किसी अन्य बिरादारी पर भरोसा जता सकती है। क्योकि भाजपा के लिए नगर विधानसभा ऐसी सीट है जिसने तीन बार संदीप अग्रवाल जैसे कर्मठ नेता को विधायक बनाया और दो बार रितेश गुप्ता को। इससे पहले दिनेश चंद रस्तौगी जनसंघ और जनता पार्टी से दो बार विधायक रह चुके है। इसलिये सबका मानना है कि यह सीट वैश्य बिरादरी पर ही जायेगी मगर सुत्रों का मानना है भाजपा इस बार वैश्य पर दांव न खेलकर किसी अन्य बिरादारी पर भरोसा जता सकती है। फिलहाल चुनाव में अभी एक साल का वक्त है लेकिन दावेदारों ने अपनी पैरवी के लिए अभी से शतरंज के मोहरे बिछान शुरू कर दिये है।



